गाय की रक्षा
 

गाय की रक्षा भारतीय नागरिकों का मूल अधिकार
‘‘चाणक्य दृष्टि’’ का नवम्बर, 2012 अंक गाय से सम्बन्धित कानून पर एक विशेषांक के रूप में प्रकाशित करने का विचार मन में आया। इसकी पृष्ठभूमि में कोई एक कारण नहीं अपितु अनेकों कारण सामने आकर खड़े हो गये। जैसे-जैसे विचार-मंथन होता गया, गाय का एक से बढ़कर एक लाभ सामने आता गया। इस विशेष अंक में हमने गाय के निम्न दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का प्रयास किया है- (1) कानूनी और संवैधानिक दृष्टिकोण, (2) धार्मिक, आध्यात्मिक परन्तु तर्क की कसौटी पर खरा उतरने वाला पूर्ण वैज्ञानिक दृष्टिकोण, (3) चिकित्सा का दृष्टिकोण, (4) कृषि के विकास का दृष्टिकोण, (5) औद्योगिक विकास का दृष्टिकोण, (6) पर्यावरण, (7) अर्थव्यवस्था।
मेरे लिए कानूनी और संवैधानिक दृष्टिकोण सबसे अधिक रुचिकर बन गया क्योंकि इस दृष्टिकोण को स्थापित करते हुए शेष चारो दृष्टिकोण आधार बन गये। कई वर्षों से मेरे मन में यह विचार आता था कि जब एक गाय से इतने व्यापक मुख्य दृष्टिकोण जुड़े हुए हों तो ऐसी गाय को केवल मात्र एक पशु मानकर उसके माँस से 10-20 आदमियों को तृप्त करना किसी भी प्रकार से बुद्धिमानी नहीं है।
हमने इस विशेष अंक में गाय के धार्मिक, आध्यात्मिक दृष्टिकोण को प्रस्तुत तो अवश्य किया है परन्तु यदि कोई व्यक्ति सच्चे और निष्पक्ष मन से इस दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करेगा तो यह स्पष्ट होगा कि गाय के साथ जुड़ी धार्मिकता और आध्यात्मिकता वास्तव में केवल मन का वहम या रूढ़िवादी परम्परा मात्र नहीं है। यह एक प्रकार की कृतज्ञता व्यक्त करने के समान है क्योंकि गाय एक ऐसा अलौकिक शरीर है जो समाज के लिए अनेकों-अनेक उपकार देता ही चला जाता है। इसके अतिरिक्त आध्यात्मिक दृष्टिकोण में यज्ञ (हवन) के रूप में पर्यावरण की समस्या का समाधान भी प्रस्तुत होता है।
गाय की रक्षा के पीछे चिकित्सा का दृष्टिकोण पूर्ण वैज्ञानिक तरीके से यह स्पष्ट करता है कि गाय का दूध, दही और घी ही नहीं अपितु गाय के मूत्र के अर्क से समाज की भयंकर बीमारियों का इलाज सम्भव है। इस पृष्ठभूमि में गाय जैसे पूजनीय जीव की हत्या महापाप ही नहीं, बहुत बड़ा समाजद्रोह अर्थात् अपराध घोषित होना चाहिए।
एक तरफ जब भारत का सर्वोच्च न्यायालय नागरिकों के लिए स्वास्थ्य के अधिकार को अनुच्छेद-21 के अन्तर्गत मूल अधिकार ही तरह घोषित कर चुका है तो उस मूल अधिकार में किसी भी प्रकार के उल्लंघन या बाधा को मूल अधिकार का हनन ही माना जायेगा। गाय का दूध, दही और घी तथा गो-मूत्र का अर्क जब पूर्ण वैज्ञानिक तरीके से मनुष्य के स्वास्थ्य में लाभकारी सिद्ध हो चुके हैं और पारम्परिक चिकित्सा में इनका सदियों से प्रयोग होता आ रहा है तो गाय की हत्या मनुष्य के स्वास्थ्य सम्बन्धी मूल अधिकार का हनन ही तो माना जायेगा।
कृषि के विकास में भी गाय का गोबर एक मात्र ऐसा साधन है जो भारतीय कृषि को समूचे विश्व में एक विशेष दर्जा दिला सकता है। गाय के गोबर से जैविक खाद का उत्पादन किया जा सकता है। जैविक खाद से जो कृषि के उत्पादन अर्थात् फल और सब्जियाँ होंगे वे भारतीय कृषि को आधुनिक बाजार में और अधिक विश्वसनीय बना देंगे। भारतीय कृषि -उत्पादन की मात्रा भी बढ़ाई जा सकती है। इससे भारतीय कृषि की रसायनिक खाद पर निर्भरता भी कम हो जायेगी और रसायनिक खाद पर खर्च की जा रही भारी राशि की भी बचत होगी। एक गाय के जीवन से लाखों-करोड़ों रुपये की राशि के बराबर कृषि क्षेत्र में योगदान हो सकता है।
इसी विशेषांक में विज्ञान की एक छात्रा का शोध लेख प्रकाशित किया जा रहा है जो अमेरिका और चीन के कुछ प्रयोगात्मक तथ्यों के आधार पर यह स्थापित करता है कि विदेशों में गाय के गोबर से बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन का कार्य भी प्रारम्भ कर दिया गया है। जिन क्षेत्रों में यह उत्पादन किया जा रहा है उन क्षेत्रवासियों की राष्ट्रभक्ति भी प्रशंसा के योग्य है क्योंकि उन्होंने गोबर से निर्मित बिजली के प्रयोग के लिए सामान्य बिजली के खर्च से अधिक राशि देना स्वीकार कर लिया। सामान्य बिजली बनाने में पर्यावरण प्रदूषण का प्रभाव भी तो उसी जनता को झेलना पड़ता है गोबर गैस के द्वारा बिजली उत्पादन में पर्यावरण प्रदूषण की समस्या भी पैदा नहीं होती। हमारे देश में शासक वर्ग, व्यापारी वर्ग और यहाँ तक कि जनता के मन से भी अब सामूहिक कल्याण की भावनाएँ समाप्त होती जा रही हैं। जबकि अब अमेरिका और चीन जैसे देशों से हमें सीखना पड़ेगा कि गाय का गोबर इतना महत्त्वपूर्ण है कि इस पर औद्योगिक क्षेत्र को भी निर्भर कराया जा सकता है।
इन विचारों के बीच जब यह स्पष्ट हो रहा है कि गाय की रक्षा अब केवल हिन्दूवादी धार्मिकता का ही प्रतीक नहीं है अपितु गाय की रक्षा से सारे देश का चहँुमुखी विकास सम्भव हो सकता है। इसलिए इन सब विचारों का संयोजन करने के उपरान्त हमारा मन यह कहता है कि अब गाय की रक्षा को भारत के नागरिकों का मूल अधिकार घोषित किया जाना चाहिए। परमपिता परमात्मा की कृपा से गाय की रक्षा का कार्य अब कठिन नहीं रहेगा।
राकेश महाजन-एडवोकेट

 

 

 

 

 

 

 

Copyright © 2011-12 Chanakya Drishti. All rights reserved.   Powered by : Pointer Soft Technologies Pvt. Ltd.

Chanakya Drishti

Chanakya Drishtit

Chanakya Drishti